पंशु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पंशु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

श्वेतसम कौमार्य !

तुम चपल हो चंचला हो,
मैं अधिक मधुमास सा,
चोंच भर सा प्रेम का रस
दंभ क्यूं ब्रज रास सा !

बिंब तुम प्रतिबिंब तुम हो
मैं तनिक नटराज सा
रक्त की रजधार का सत
आरंभ यूं निज ताप का !

(pic used only for referential purpose)


सत की डुबकी शांत तुम हो
फैलना नवरास सा
दाग आंचल पर अमिट कर
सानंद सती संताप का!

देवता की देह तुम हो
या रज अधर सहवास का?
प्रेरणा के प्रेम बनकर
किन्नर कुंवरि अभिसार का!

सृष्टि का आश्चर्य तुम हो
उतंग जल पाताल का
कृष्ण से जन्मांत प्रेमी
स्वप्न के स्वर राज का!

नववधू सा रूप तुम हो
निज नहीं कुछ पास का
चांद चंचल से चपल चर
श्वेतसम कौमार्य का!

तुम चपल हो चंचला हो,
मैं अधिक मधुमास सा,
चोंच भर सा प्रेम का रस
दंभ क्यूं ब्रज रास सा !

पंशु 10102015




(Inspired from “The Virgin in White” by Ramya Vasishta)

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

श्वेतसम कौमार्य!



तुम चपल हो चंचला हो,
मैं अधिक मधुमास सा,
चोंच भर सा प्रेम का रस
दंभ क्यूं ब्रज रास सा !

बिंब तुम प्रतिबिंब तुम हो
मैं तनिक नटराज सा
रक्त की रजधार का सत
आरंभ यूं निज ताप का !

(pic used only for referential purpose, no copyright infringement intended)


सत की डुबकी शांत तुम हो
फैलना नवरास सा
दाग आंचल पर अमिट कर
सानंद सती संताप का!

देवता की देह तुम हो
या रज अधर सहवास का?
प्रेरणा के प्रेम बनकर
किन्नर कुंवरि अभिसार का!

सृष्टि का आश्चर्य तुम हो
उतंग जल पाताल का
कृष्ण से जन्मांत प्रेमी
स्वप्न के स्वर राज का!

नववधू सा रूप तुम हो
निज नहीं कुछ पास का
चांद चंचल से चपल चर
श्वेतसम कौमार्य का!

तुम चपल हो चंचला हो,
मैं अधिक मधुमास सा,
चोंच भर सा प्रेम का रस
दंभ क्यूं ब्रज रास सा !

पंशु 10102015



(Inspired from “The Virgin in White” by Ramya Vasishta)

सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

फिर करेंगे यार मेेरे तुझसे, मेरे गम की बातें.

-पंशु-

(Picture used only for referential purpose, no commercial use intended.)

​दरो दीवार से क्या पूछो मेरे दम की बातें,
मेेरे उस यार से पूछो मेरे गम की बातें.

वो मिरा यार सहर में मुझे बहलाता है,
तुम हो कि शाम से पूछो मेरे गम की बातें.

इक ​​तेरे दोस्त से बस की शिकायत थोड़ी सी,
​अब​ ना कहना ना मालूम मेरे गम की बातें.

ये बातें वो बातें बची गुजरी सारी बातें,
जगरातें सोै रातें करतीं मेरे गम की बातें.

लौट आओ ना, बसते तो नहीं लगते हो,
फिर करेंगे यार मेेरे तुझसे, मेरे गम की बातें.

© पंशु। 13102014