शुक्रवार, 8 जून 2012

आलोचनाएं मजबूत बनाती हैं: विधु विनोद चोपड़ा

इन दिनों विधु विनोद चोपड़ा फुल टाइम प्रोड्यूसर के रोल में हैं। विधु को जो करीब से जानते हैं, वे ये भी जानते हैं कि एक पल हंसता खिलखिलाता चेहरा कैसे अगले ही पल एकदम से एक पत्रकार के लिए दुस्वप्न साबित हो सकता है। किसी फिल्म समीक्षक को दौड़ाकर पीटने वाले वह अकेले फिल्म निर्माता है, लेकिन साथ ही किसी फिल्म समीक्षक से शादी करने वाले भी वह अकेले ही हैं। सितारों से ज्यादा कलाकारों और टोटकों से ज्यादा फिल्म की कहानी में यकीन रखने वाले विधु विनोद चोपड़ा से एक खास बातचीत।

© पंकज शुक्ल


कुछ ज्यादा ही वक्त नहीं लग गया आपकी नई फिल्म फरारी की सवारी की रिलीज में?
-हां, कह सकते हैं। लेकिन, अगर एक दमदार कथानक वाली और किसी ऐसे विषय वाली फिल्म पर काम करना हो, जो आपको रोज कुछ न कुछ नया सोचने को मजबूर करती हो, तो इससे ज्यादा वक्त भी अगर किसी फिल्म पर लगता हो तो मुझे दिक्कत नहीं है। फरारी की सवारी का आइडिया पहली पहली बार मुझे इसके निर्देशक राजेश मापुस्कर ने तब सुनाया था, जब हम पहली मुन्नााभाई फिल्म पर काम शुरू करने जा रहे थे। फिर, हम लोग दूसरी फिल्मों में व्यस्त रहे और इस विचार पर काम शुरू नहीं हो सका। कोई चार साल से ये फिल्म लिखी जा रही है और हम इसे लेकर फ्लोर पर तभी गए, जब हम सब पूरी तरह मुतमईन थे कि हां अब ये फिल्म शुरू की जा सकती है।

इस हम सब में मुन्नाभाई सीरीज के निर्देशक राजकुमार हीरानी भी शामिल हैं? बतौर संवाद लेखक उनका कितना योगदान है इस फिल्म में?
-राज कुमार हीरानी (एक एक शब्द पर जोर देकर बोलते हैं)। हां, भाई अब राजू भी राज कुमार हीरानी बन गया है। सेलेब्रिटी है। तो उसके साथ होने से अब हमें कुछ ना कुछ तो फायदा होगा ही। लेकिन, अगर दूसरे लिहाज से भी देखा जाए तो राजू हमारी टीम का अब अहम हिस्सा है। राजेश मापुस्कर और राजकुमार हीरानी की दोस्ती तब की है जब दोनों एक साथ विज्ञापन फिल्में बनाया करते थे। राजेश तब राजू का प्रोडक्शन का काम देखा करता था। शायद मुन्नाभाई पर काम करते वक्त किसी दिन नशे में राजू ने राजेश को उसके निर्देशक बनने पर फिल्म के संवाद लिखने का वादा कर दिया था। वही वादा राजू निभा रहा है। और, हां मुझे इस बात पर दिली खुशी होती थी जब राजू किसी सीन के डॉयलॉग लिखकर लाता था और राजेश उसे खारिज कर देता था। इस बंदे ने मेरे साथ भी मुन्नाभाई सीरीज के दौरान ऐसा ही सुलूक किया है, अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे।

राजेश मापुस्कर को फिल्म के निर्देशन का जिम्मा सौंपने को आप एक जोखिम भरा फैसला मानते हैं कि नहीं?
जिंदगी में बिना जोखिम के मैंने कम ही काम किया है। मेरे लिए किसी भी फिल्म की कहानी महत्वपूर्ण है। राजेश का ही ये विचार था। मैंने फिर राजेश के साथ मिलकर इस आइडिया को डेवलप किया और जब पूरी फिल्म लिखकर तैयार हुई तो मुझे लगा कि राजेश ही इस फिल्म को बेहतर तरीके से परदे पर ला सकता है। राजेश ने राजू हीरानी के साथ रहकर फिल्म निर्देशक की बारीकियां सीखी हैं और इन फिल्मों के दौरान भी उसने कई बार रोचक और सोचने पर मजबूर कर देने वाले सुझाव भी दिए। मेरा मानना है कि एक फिल्म की कहानी ही उसका सबसे बड़ा यूएसपी होनी चाहिए। निर्देशक अहम होता है, लेकिन मेरे लिए जब सुपरस्टार मायने नहीं रखते तो फिर निर्देशक तो बाद की बात है।

किसी फिल्म को बनाने के लिए आप उसमें सबसे पहले क्या जरूरी तत्व तलाशते हैं?

मेकिंग शुरू की तो बस दो ही चीजें मेरे पास हुआ करती थीं, एक मैं और दूसरा मेरा सिनेमा। एकाकीपन में आप जो सोचते हैं, उस पर समाज का असर कई बार कम और आपकी अपनी याददाश्त या दूसरी बातों का असर ज्यादा होता है। अब आप मेरी फिल्म खामोश को लीजिए। आज की तारीख में अगर मुझे वो फिल्म दोबारा बनानी हो तो उसके लिए कास्टिंग करते वक्त मेरा दिमाग दूसरी तरह काम करेगा। अब मैं अमोल पालेकर वाले किरदार में आमिर खान को लेना चाहूंगा।

आलोचनाओं से आपको बैर क्यों है?
किसने कहा? दरअसल मेरा व्यवहार कई बार ऐसा हो जाता है कि लोग मेरे बारे में गलत राय बना लेते हैं। मैं वैसा हूं नहीं जैसी प्रतिक्रियाएं कई बार मुझसे हो जाती हैं। मैं थोड़ा उद्विग्न रहने वाला या कह लें कि आवेग के साथ काम कर जाने वाला इंसान हूं। मुझे लगता है कि जो लोग ज्यादा सोचते हैं, उनके विचारों की गति टूटने से वे उत्तेजित हो जाते हैं। आलोचनाओं को मैं तो बहुत ही सकारात्मक तरीक से लेता हूं। सच पूछिए तो कम ही लोग होंगे इंडस्ट्री में जो रिलीज से पहले अपनी फिल्म दर्जनो लोगों को दिखाते हैं। मैं तो जानबूझकर ऐसा करता हूं। मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी फिल्म के बारे में बातें करते सुनना और देखना पसंद करता हूं। मैं चाहता हूं कि लोग मुझे बताएं कि मैंने गलती कहां की? मेरी निजी राय है कि आप आलोचनाओं से मजबूत होते हैं। आपके लिखने, कहने के ढंग में आलोचनाओं से ही तब्दीली आती है।

संपर्क - pankajshuklaa@gmail.com