शनिवार, 15 मई 2010

महाराष्ट्र की सियाती शतरंज पर अब ‘ख़ाकी’ की बिसात

मुंबई। आईपीएल मैचों में मनोरंजन कर के मुद्दे पर महाराष्ट्र की सियासी शतरंज में अपनी गोटी पिटवा चुकी एनसीपी अब नई बिसात बिछा रही है। ये बिसात है अपने चहेते अफसर को मुंबई पुलिस कमिश्नर बनाने की और इस बिसात पर एनसीपी का खेल बिगाड़ने के लिए कांग्रेस खुलकर मैदान में उतर चुकी है। पुणे के पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह पुलिस विभाग में अगले महीने की शुरुआत में होने वाले फेरबदल में मुंबई पुलिस कमिश्नर बनने की रेस में सबसे आगे बताए जाते हैं। वहीं, गृह राज्य मंत्री और कांग्रेस विधायक रमेश बागवे ने पुणे पुलिस की कार्यशैली की सीआईडी जांच कराने की मांग करके अपने ही सीनियर यानी राज्य के गृह मंत्री आर आर पाटिल को धर्मसंकट में डाल दिया है।

कांग्रेस और एनसीपी के बीच महाराष्ट्र में चल रहे शह और मात के मुकाबले में इस बार ख़ाकी पर खेल होने जा रहा है। और, इसकी शुरुआत भीतरखाने हो भी हो चुकी है। इस खेल का पहला मोहरा चला जाएगा 31 मई को, जिस दिन महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक ए एन राय रिटायर होंगे। माना ये जा रहा है कि राय के उत्तराधिकारी के रूप में राज्य के दूसरे सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हसन ग़फूर की तैनाती होगी, जो इस वक्त एंटी करप्शन ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक हैं। महाराष्ट्र में पुलिस महानिदेशक स्तर के तीन पद हैं, इनमें तीसरा पद है पुलिस महानिदेशक हाउसिंग का। गफूर के डीजीपी महाराष्ट्र बनने के बाद खाली हुए पद पर मुबंई के मौजूदा पुलिस कमिश्नर डी शिवनंदन की तैनाती हो सकती है, जिनके एडीजी से डीजी के लिए प्रमोशन में अब महीने भर से भी कम का वक्त बचा है।

ख़ाकी पर सियासत का असली खेल इसके साथ ही शुरू होता है। डी शिवनंदन का प्रमोशन होते ही अपनी पसंद का मुंबई पुलिस कमिश्नर लाने की कोशिशें कांग्रेस और एनसीपी दोनों में जारी हैं। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने हालांकि अभी इस बारे में अपनी कोई राय नहीं बनाई है और वह मुख्य सचिव जे पी डांगे की अध्यक्षता में गठित पैनल की उस रिपोर्ट के इंतज़ार में हैं जिसमें महाराष्ट्र के नए डीजीपी के चयन के बारे में सिफारिशें की जाएंगी।

राय के रिटायर होने और शिवनंदन के प्रमोशन के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर बनने की दौड़ में वरिष्ठता के लिहाज से पांच आईपीएस अफसर हैं। इनमें एसआरपीएफ चीफ अजित परसनिस, स्पेशल ऑपरेशन चीफ संजीव दयाल, सीआईडी चीफ एस पी एस यादव, पुणे के पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह और एडीजी ट्रैफिक अरुप पटनायक शामिल हैं। इनमें से पुणे के पुलिस कमिश्नर को मुंबई का पुलिस कमिश्नर न बनने देने की कांग्रेस का एक धड़ा पूरी कोशिश कर रहा है। गृह राज्य मंत्री रमेश बागवे के पासपोर्ट प्रकरण ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। पुणे में पुलिस चौकियों को बंद किए जाने के मुद्दे पर आमने सामने रहे बागवे और सत्यपाल सिंह की अनबन के पीछे बागवे का पासपोर्ट ही है, जिसे पुणे पुलिस की रिपोर्ट के बाद पासपोर्ट दफ्तर ने रिन्यू नहीं किया।

अब सत्यपाल सिंह ने दो कदम पीछे जाते हुए पुणे की सभी बंद की गई पुलिस चौकियों को फिर से खोलने का आदेश जारी कर दिया है। सियासी जानकार इसे गृह राज्य मंत्री का अहम संतुष्ट करने की कार्यवाही बता रहे हैं, लेकिन बागवे किसी भी सूरत में पुणे पुलिस कमिश्नर को माफ करने के मूड में नहीं है। इधर पुणे पुलिस कमिश्नर बागवे की लंबे समय से चली आ रही पुलिस चौकियों को फिर से चालू करने की ज़िद पूरी कर रहे थे, उधर बागवे मीडिया के सामने पुणे पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच सीआईडी से कराने की मांग कर रहे थे। बागवे इसके पहले भी अपने सीनियर यानी गृह मंत्री आर आर पाटिल को परेशानी में डाल चुके हैं, जब उन्होंने पिछले महीने पुणे पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह के तबादले का अपनी मर्जी से ऐलान करके पूरी सरकार को हैरानी में डाल दिया था।

पंकज शुक्ल। नई दुनिया, नई दिल्ली में 15 मई 2010 को प्रकाशित)