मंगलवार, 14 अक्तूबर 2008

लखनऊ में कश्मीर...

भोले शंकर (19). गतांक से आगे...

फिल्म भोले शंकर की मेकिंग के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि यूनिट से जुड़े सभी लोगों का सिर ईश्वर के सामने धन्यवाद के लिए झुक गया। कहते हैं कि तकदीर हौसला करने वालों का ही साथ देती है और भोले शंकर का पूरा लखनऊ शेड्यूल इसी हौसले के साथ चलता रहा। ऐसा कम ही होता है कि किसी फिल्म का शेड्यूल तय समय से एक दिन पहले ही खत्म हो जाए, लेकिन हमने भोले शंकर की मेकिंग के दौरान ऐसा भी किया। फिल्मों के गानों की शूटिंग के दौरान अक्सर हम देखते हैं कि पेड़ों के पीछे एक खास तरह की धुंध दिखती है, साफ मौसम में इसके लिए ना जाने कितने जतन करने पड़ते हैं। फॉग मशीन मंगाओ, बड़े बड़े फैन्स मंगाओ, पूरी लाइटिंग उसी लिहाज से सेट करो और इसके बावजूद भी भरोसा नहीं रहता है कि जैसा चाहिए वैसा असर आएगा भी या नहीं।

फिरंगियों के चक्कर में जो गाना हम दो अंतरे करके चले आए थे, उसका बाकी बचा अंतरा हमने अगले दिन लखनऊ में दूसरी जगह शूट करने का फैसला किया। कोरियोग्राफर रिक्की जो आदतन घुमक्कड़ टाइप के हैं, ने लखनऊ में जहां हम ठहरे थे, उसी रिसॉर्ट के दूसरी तरफ एक नायाब लोकेशन गाने के लिए तलाश ली। ये लोकेशन ऐसी है कि परदे पर आपको लगेगा कि गाना कश्मीर में शूट हुआ है। और, इस अंतरे की शूटिंग में हम पर कुदरत भी पूरी तरह मेहरबान रही। साफ मौसम ने अचानक अंगड़ाई ली और पूरे आसमान को बादलों ने ढंक लिया। पूरा मौसम बिल्कुल गाने के मूड के हिसाब से अपनेआप बन गया। छुटपुट बारिश भी शुरू हो गई और लाइट बस इतनी कि गाना शूट हो सके। इस दिन ईश्वर ने तो बहुत साथ दिया, लेकिन हमारे हीरो मनोज तिवारी दूसरो को खुश करने के चक्कर में हमें परेशान कर गए।

दरअसल मनोज तिवारी जल्दी जल्दी किसी को ना नहीं कर पाते। कहते हैं कि ना कहना भी एक कला है। और कामयाबी के लिए इसे सीखना भी बहुत ज़रूरी होता है। एक स्टार और एक चमकते सिक्के में ज़्यादा फर्क नहीं होता। सिक्का जितना कम चलता है, उसकी चमक उतने ही ज़्यादा दिन कायम रहती है और स्टार भी जितना सोच समझ कर कम फिल्में करता है, उसके करियर की गाड़ी भी उतनी ही लंबी चलती है। मनोज तिवारी की शुरू की दो फिल्में ससुरा बड़ा पइसा वाला और दरोगा बाबू आई लव यू जैसे ही हिट हुईं, धनकुबेरों ने उनके लिए अपनी तिजोरियां खोल दीं। टी सीरीज के ऑफिस की कैंटीन में पूरा पूरा दिन गुजार देने वाले किसी भी गायक को अपने नाम की ऐसी कीमत पता चले तो ज़ाहिर है वो मुश्किल से ही अपने पर काबू रख पाएगा। मनोज तिवारी ने कुछ रिश्ते निभाने के लिए, कुछ बॉलीवुड के बड़े बड़े नामों के साथ अपना नाम जोड़ने के लिए और कुछ बस पैसे कमाने के लिए एक के बाद एक दनादन फिल्में साइन कर लीं। चार साल में पैंतीस फिल्में करना किसी भी कलाकार के लिए फख्र की बात हो सकती है। लेकिन, इसका नुकसान भी मनोज तिवारी को हुआ है। लोगों ने मनोज तिवारी का नाम कैश कराने के लिए मार्केट में बेसिर पैर की फिल्मों की लाइन लगा दी। अब भोजपुरी फिल्में देखने वाले बाहर से तो आने से रहे और बिहार, मुंबई, पंजाब, दिल्ली और यूपी में लोग फिल्म देखने जाते हैं मनोरंजन के लिए, लेकिन ये दर्शक ऐसे हैं कि इन्हें आप अमिताभ बच्चन का नाम लेकर भी बुद्धू नहीं बना सकते।

खैर हम बात कर रहे थे केहू सपना में अचके जगा के गाने के तीसरे अंतरे की। ये अंतरा हमने दोपहर बाद शूट करने का प्लान बनाया था, लिहाजा एक दिन पहले शाम को ही मैंने मनोज को बता दिया कि अगले दिन उनकी ज़रूरत दोपहर दो बजे पड़ेगी। मैं अपने कमरे से सुबह आठ बजे बाहर निकला तो मनोज सोए हुए थे। मनोज तिवारी के स्पॉट ब्वॉय विकास को मैंने समझा दिया कि वो मनोज को सोने दें और करीब 11 बजे ही जगाएं ताकि तैयार होकर वो दो बजे लोकेशन पर पहुंच सकें। करीब 12 बजे से मैंने अंतरे की शूटिंग के लिए शॉट लगवाना शुरू किया और साथ ही मनोज को फोन किया। पता चला कि वो तो कब के तैयार होकर लखनऊ के किसी थिएटर में अपनी किसी फिल्म का प्रचार करने निकल गए हैं। पूरी यूनिट के तो हाथों के तोते उड़ गए। दोपहर दो बजे के लिए लग रहा शॉट तो एक घंटे में ही रेडी हो गया, लेकिन उस दिन मनोज तिवारी सेट पर तय समय से पूरे दो घंटे लेट पहुंचे। लोकेशन पर आते ही मनोज तिवारी को मेरे गुस्से का अंदाज़ा हो गया था, लिहाजा वो बडी देर तक चुहल करते रहे, मेरा मूड ठीक करने की कोशिश में उन्होंने सबके सामने अपने हाथ से एक विदेशी घड़ी निकालकर भी मुझे ऐलानिया तौर पर गिफ्ट कर दी, घड़ी कम से कम लाख रुपये की रही होगी। गलती मनोज तिवारी की भी नहीं थी, ऐसे में गलती होती है उन लोगों की, जो शूटिंग के बीच पहुंचकर किसी सितारे से अपने रिश्तों को तौलने बैठ जाते हैं। अब हीरो इनसे बात ना करे तो ये नाराज़ और इनसे बात करने के दौरान अगर शूटिंग रुकी रही तो फिल्म का प्रोड्यूसर- डायरेक्टर नाराज़।

मैंने भी कह दिया कि अगर सूरज ढलने के पहले ये अंतरा शूट नहीं हुआ तो फिल्म में गाना दो अंतरे का ही जाएगा। ये तीसरा अंतरा दोबारा और कहीं शूट नहीं होगा। रूसा रूसी के इस माहौल को हल्का करने का काम किया मौसम ने। सूरज ने बादलों के बीच से आंख मिचौनी करनी शुरू कर दी, और कोरियोग्राफर रिक्की ने मनोज तिवारी की चापलूसी। बाद में मुझे पता चला कि मनोज तिवारी को देरी से आने के लिए रिक्की ने ही कहा था और ये काम रिक्की ने मनोज की दूसरी जगह व्यस्तता को देखते हुए कहा या फिर अपनी फिल्म छुटका भइया ज़िंदाबाद के लिए डेट्स निकलवाने की ख़ातिर उनको खुश करने के लिए, ना मैंने जानने की कोशिश की और ना ही मैंने इसकी ज़रूरत समझी। रिक्की ने जो किया था, वो कतई प्रोफेशनल नहीं था, और ये बात मैंने रिक्की से स्पष्ट तौर पर कह भी दी। इसके बाद रिक्की और मनोज तिवारी ने मिलकर समय के नुकसान की भरपाई के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया। किसी तरह जल्दी जल्दी हम लोगों ने गाना शूट किया। कैमरा मैन राजूकेजी आखिर तक कन्फ्यूज रहे कि उन्हें सही लाइट मिली या नहीं। मैंने तभी राजू भाई से कह दिया था कि वे निश्चिंत रहे, आखिरी रिजल्ट हमारे ही हक़ में जाएगा। लेकिन शूटिंग के बाद फिल्म जब एडिट टेबल पर पहुंची तो मुंबई में सबसे पहले राजूकेजी ने यही अंतरा आकर देखा और जब रिजल्ट उन्हें सही मिले, तो उनकी भी जान में जान आई। मनोज तिवारी और मोनालिसा पर हमने ये अंतरा दोपहर के दो बजे के बाद फिल्माया, लेकिन हमारी शूटिंग तो सुबह आठ बजे से जारी थी। इस दिन सुबह सवेरे मोनालिसा ने किया कौन सा कमाल और दूसरी हीरोइन लवी रोहतगी की किस बात पर होटल में मचा बवाल? जानने के लिए पढ़ते रहिए - कैसे बनी भोले शंकर?

पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर